सरना धर्मावलंबियों का महाजुटान, चांद गांव की चंगाई सभा के विरुद्ध गूंजा विरोध

रांची । रांची के तुपुदाना स्थित दसमाइल चौक में रविवार को क्षेत्रीय सरना समिति झारखंड प्रदेश और विभिन्न सरना संगठनों की ओर से आदिवासी सरना बचाओ महारैली का आयोजन रविवार को किया गया। इस रैली में बड़ी संख्या में सरना धर्मावलंबियों ने भाग लिया और चांद गांव में बीते दो वर्षों से चल रही चंगाई प्रार्थना सभा का कड़ा विरोध जताते हुए आरोप लगाया कि इन सभाओं के माध्यम से भोले-भाले आदिवासी सरना समुदाय का योजनाबद्ध तरीके से धर्मांतरण किया जा रहा है। सभा की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश अध्यक्ष रामपाहन बांडो ने कहा कि सिर्फ चांद गांव ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड में जबरन धर्मांतरण का गंदा खेल चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीबी, लाचारी और बेबसी का फायदा उठाकर लोगों को चंगाई सभा में बुलाया जाता है, जहां कई प्रकार की गंभीर बीमारियों को ठीक करने के नाम पर प्रलोभन दिया जाता है। बाद में लोगों का मन बदला जाता है और उन्हें धर्म परिवर्तन करने के लिए विवश किया जाता है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि सरना धर्मावलंबियों की संख्या लगातार घटते हुए अब 5० प्रतिशत से भी नीचे पहुंच चुकी है। समिति के संरक्षक मेघा उरांव ने कहा कि चर्च और मिशनरी संस्थाओं की ओर से आयोजित प्रार्थना और चंगाई सभाओं को झारखंड सरकार का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने याद दिलाया कि चांद गांव की चंगाई सभा के संबंध में पहले भी प्रशासन को लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई जो दिखाता है कि सरकार ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने की इच्छुक ही नहीं है। वहीं सोमा उरांव ने कहा कि अंग्रेज भले चले गए हों, लेकिन उनकी छोड़ी हुई सांस्कृतिक छाप अब भी आदिवासियों को प्रभावित कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि चंगाई सभा के नाम पर आदिवासियों को ईसाई बनाने का प्रयास जारी है और सरना समाज को अब एकजुट होकर इसका विरोध करना ही होगा। सभा के बाद सरना समुदाय के लोग चांद गांव की ओर बढ़ने लगे, लेकिन प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए सभी को दसमाइल चौक पर ही रोक दिया। इस दौरान राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए। सरना मौके पर धर्मावलंबियों ने एक स्वर में आदिवासी अस्मिता की रक्षा के संकल्प को दोहराया।

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