पेंशन भुगतान करने के एकलपीठ का आदेश रद्द रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी अपने सेवाकाल में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योजना को स्वीकार कर लेता है और उसके अंतर्गत सभी टर्मिनल लाभ प्राप्त कर लेता है, तो वह बाद में राज्य सरकार की पेंशन योजना का दावा नहीं कर सकता। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस राजेश कुमार की अदालत ने इस आधार पर एकल पीठ के पेंशन भुगतान के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि ईपीएफ का लाभ लेना यह दर्शाता है कि कर्मचारी ने स्वेच्छा से उस वैधानिक व्यवस्था को चुना है। ऐसे में राज्य पेंशन का अधिकार स्वतः समाप्त हो जाता है। एकलपीठ में सावित्री देवी ने याचिका दायर कर कहा गया था कि उनके दिवंगत पति जॉय कुमार महतो की नियुक्ति वर्ष 1967 में बिहार सरकार के खाद्य आपूर्ति एवं वाणिज्य विभाग में चौकीदार (चतुर्थ वर्ग) के रूप में हुई थी। वर्ष 1973 में उन्हें बिहार राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम में प्रतिनियुक्त किया गया, जहां वे दुमका डिपो में कार्यरत रहे। 31 जुलाई 1991 को वह सेवानिवृत्ति हो गए। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पेंशन भुगतान की मांग की, जिसे अस्वीकार किए जाने पर वर्ष 2007 में झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने इस पर सुनवाई के बाद बिहार सरकार को पेंशन भुगतान का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ बिहार सरकार ने खंडपीठ में अपील दायर की। खंडपीठ ने सुनवाई के बाद एकलपीठ के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि कर्मचारी ने लंबे समय तक ईपीएफ योजना को अपनाया, उसमें योगदान दिया और सेवा समाप्ति पर पूरी राशि बिना किसी आपत्ति के स्वीकार की। कर्मचारी ने लगभग 16 वर्षों तक पेंशन के लिए कोई दावा नहीं किया, जो उसके दावे को कमजोर करता है। कोर्ट ने कहा कि पेंशन कोई स्वचालित लाभ नहीं है, बल्कि यह सेवा शर्तों और चुनी गई वैधानिक योजना पर निर्भर करता है। यदि कोई कर्मचारी ईपीएफ जैसी वैकल्पिक व्यवस्था को चुनता है और उसके तहत लाभ लेता है, तो वह बाद में राज्य पेंशन का दावा नहीं कर सकता। कर्मचारी एक साथ दोहरी सुविधा नहीं ले सकता। यानी ईपीएफ के तहत टर्मिनल लाभ लेने के बाद राज्य पेंशन की मांग करना कानूनन स्वीकार्य नहीं है। यह फैसला उन सभी कर्मचारियों के लिए अहम है, जो सेवा के दौरान ईपीएफ और पेंशन के विकल्प को लेकर भ्रम में रहते हैं।