रांची । झारखंड सरकार द्वारा पेसा कानून, 1996 को लागू करने के लिए बनाई गई पेसा नियमावली–2025 की राज्य की प्रमुख सत्ताधारी पार्टी झामुमो (JMM) खुलकर वकालत कर रही है। वहीं दूसरी ओर यह नियमावली अब सियासी बहस का बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। विपक्ष के साथ-साथ सत्ताधारी कांग्रेस भी इस मसले पर मुखर नजर आ रही है। कांग्रेस में इस मुद्दे को लेकर दो राय उभरकर सामने आई है। एक ओर पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव पेसा नियमावली के प्रावधानों को 1996 के मूल पेसा अधिनियम के अनुरूप नहीं मान रहे हैं, जबकि दूसरी ओर विधायक बंधु तिर्की और कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की जैसे नेता मौजूदा नियमावली का समर्थन कर रहे हैं। इस बीच कांग्रेस विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप ने भी स्पष्ट किया है कि पार्टी के भीतर इस विषय पर एक राय नहीं बन पाई है। उन्होंने कहा कि पेसा नियमावली को और बेहतर बनाने के लिए कांग्रेस जल्द ही एक अहम बैठक करने जा रही है। बैठक में जो भी सुझाव सामने आएंगे, उन्हें संकलित कर आवश्यक सुधार के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी।उन्हें मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा। राजेश कच्छप ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार ने करीब ढाई से तीन दशक बाद पेसा कानून को जमीन पर उतारने का रास्ता साफ किया है। हमारा प्रयास है कि एक मजबूत और प्रभावी पेसा नियमावली बने, ताकि 13 अनुसूचित जिलों में काम करने वाले सभी अधिकारी पहले से ही पेसा कानून के अनुरूप अपनी कार्यशैली और सोच तैयार कर सकें। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी 15 से 17 जनवरी तक झारखंड के दौरे पर रांची में रहेंगे। इस दौरान वे बीएलए के 75 मास्टर ट्रेनरों के प्रशिक्षण शिविर में शामिल होंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इन्हीं तीन दिनों में से किसी एक दिन प्रदेश प्रभारी पेसा नियमावली को लेकर विधायक, सांसद, पूर्व विधायक और पूर्व सांसदों के साथ रायशुमारी की बैठक कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद कांग्रेस की आधिकारिक राय सामने आएगी, जो आगे चलकर पेसा नियमावली में संभावित संशोधनों की दिशा तय कर सकती है।