फिर चूक गए तेजस्वी , तेज प्रताप के चूड़ा-दही भोज में नहीं पहुंचे, लालू ने निभाया पिता का ‘फर्ज’

पटना: बिहार की राजधानी पटना के 26 एम स्ट्रैंड रोड स्थित एक आवास पर बुधवार, 14 जनवरी को दिनभर राजनीतिक गहमा-गहमी देखने को मिली। मौका था जनशक्ति जनता दल के नेता तेज प्रताप यादव द्वारा आयोजित पारंपरिक चूड़ा-दही भोज का। इस भोज के लिए तेज प्रताप यादव ने सत्ता और विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं को आमंत्रित किया था। बुधवार सुबह जैसे ही भोज की शुरुआत हुई, तेज प्रताप यादव के आवास पर बड़े नेताओं का आना-जाना शुरू हो गया। भोज में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा, मंत्री अशोक चौधरी, विधायक चेतन आनंद, तेज प्रताप यादव के मामा साधू यादव सहित कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियां शामिल हुईं। हालांकि, इस भोज से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की दूरी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी रही। तेजस्वी यादव के न आने को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जाते रहे। इस पर खुद तेज प्रताप यादव ने तंज कसते हुए कहा, “मैंने अपने छोटे भाई तेजस्वी को भी आमंत्रण भेजा था। वह थोड़ा देर से उठता है। मैंने दही-चूड़ा भोज के लिए पक्ष और विपक्ष, दोनों के नेताओं को न्योता दिया था। अब आना या न आना उनकी मर्जी है। जो आए, उन्होंने भोज का आनंद लिया और मुझे आशीर्वाद दिया।” तेज प्रताप यादव ने यह भी कहा कि बीमार होने के बावजूद उनके पिता लालू प्रसाद यादव भोज में पहुंचे और पिता का फर्ज निभाया। उन्होंने कहा, “मेरे पिताजी आए, उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया। तबीयत ठीक नहीं होने के बावजूद वे कुछ देर रुके। एक पिता हमेशा अपने बेटे को आगे बढ़ने के लिए आशीर्वाद देता है और उन्होंने वही किया। मुझे बहुत अच्छा लगा कि वे आए।” तेज प्रताप यादव के चूड़ा-दही भोज ने न सिर्फ मकर संक्रांति की परंपरा को राजनीतिक रंग दिया, बल्कि परिवार और राजनीति के रिश्तों को लेकर भी नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।

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