रांची: साल 2009 में पुलिस टीम पर जानलेवा हमले के आरोप में जेल में बंद नक्सली कुंदन पाहन को रांची सिविल कोर्ट ने बरी कर दिया है। अपर न्याययुक्त संजीव झा की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में यह फैसला सुनाया। मामले की सुनवाई के दौरान कुंदन पाहन की ओर से अधिवक्ता ईश्वर दयाल ने बचाव पक्ष की दलीलें पेश कीं। यह मामला 24 अक्टूबर 2009 का है, जब पुलिस को इनपुट मिला था कि जोन्हा फॉल के पास नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं। अलर्ट मिलने के बाद मूरी ओपी और अनगड़ा थाना की संयुक्त टीम इलाके में छापेमारी के लिए पहुंची थी। उसी दौरान सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई। फायरिंग के बाद घटनास्थल से पुलिस ने हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की थी। इस मामले में रांची के अनगड़ा थाना में कांड संख्या 61/2009 के तहत कुंदन पाहन समेत अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा पेश साक्ष्य आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए। इसी आधार पर कोर्ट ने कुंदन पाहन को बरी कर दिया