दिशोम गुरु के लिए, वीर शिबू सोरेन अमर रहे के नारे से गूंजी रांची

दिल्ली से पार्थिव शरीर पहुंचते ही अंतिम दर्शन को उमड़ा जनसैलाब रांची: झारखंड आंदोलन से सबसे बड़ी जननायक, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक और झारखंड आंदोलन के पुरोधा दिशोम गुरु शिबू सोरेन अब हमारे बीच नहीं हैं। रविवार की शाम जब उनका पार्थिव शरीर रांची एयरपोर्ट पहुंचा, तो मानो पूरा झारखंड ठहर गया। एयरपोर्ट से लेकर मोरहाबादी स्थित आवास तक जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर आंख नम थी, हर चेहरा गमगीन। “जब तक सूरज चांद रहेगा, गुरुजी शिबू सोरेन का नाम रहेगा”, “वीर शिबू सोरेन अमर रहें”—इन नारों से फिजा गूंज उठी। गुरुजी के अंतिम दर्शन के लिए सड़क के दोनों ओर लोग कतार में खड़े रहे। आदिवासी छात्रावास की छात्राएं पारंपरिक वेशभूषा में सड़क किनारे हाथ जोड़कर खड़ी थीं। वृद्धों से लेकर बच्चों तक, महिलाएं, युवक, सभी भावविभोर थे। रांची एयरपोर्ट पर राज्य के कोने-कोने से आए लोगों ने नम आंखों से श्रद्धा-सुमन अर्पित किया। उनके चाहने वालों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर लिखा था—”गुरुजी, आपने जो दिया, वो कोई नहीं दे सका।” गुरुजी का पार्थिव शरीर मोरहाबादी स्थित आवास पर रखा गया है। वहां राज्य सरकार के मंत्री योगेंद्र प्रसाद, विधायक सुदिव्य कुमार सोनू समेत कई नेता-कार्यकर्ता पहले से मौजूद थे। सरकार ने शिबू सोरेन के अंतिम संस्कार के लिए राजकीय सम्मान के साथ विस्तृत कार्यक्रम तय किया है। 5 अगस्त को सुबह 10 बजे उनका पार्थिव शरीर झारखंड विधानसभा परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। जनप्रतिनिधि, अधिकारी और आम लोग उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद दोपहर 12 बजे उनका पार्थिव शरीर रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड स्थित पैतृक गांव नेमरा ले जाया जाएगा, जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। रांची और रामगढ़ जिला प्रशासन को पूरे मार्ग पर समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। इस अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए केंद्रीय आदिवासी कल्याण मंत्री जोएल ओराम भी रांची पहुंच चुके हैं। वहीं, एयरपोर्ट पर कैबिनेट मंत्री इरफान अंसारी, दीपिका पांडेय सिंह, विधायक हेमलाल मुर्मू, सुरेश पासवान, श्वेता सिंह, नमन विक्सल कोंगाड़ी, विकास सिंह मुंडा, ममता देवी, निरल पूर्ति, उमाकांत रजक समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। झारखंड ने आज न सिर्फ एक राजनेता, बल्कि अपना जननायक खोया है। झारखंड की आत्मा जैसे मौन हो गई हो।

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