पेसा नियमावली से आदिवासी शोषण पर लगेगा विराम, भाजपा की राजनीतिक हथकंडे 2026 में समाप्त हो जायेंगे : सुप्रियो भट्टाचार्य

रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार द्वारा पेसा नियमावली बनाए जाने से ग्रामीणों को शोषण और दोहन से मुक्ति मिलेगी। इससे भाजपा की आदिवासी विरोधी राजनीति पूरी तरह नेस्तनाबूत हो गई है। नियमावली लागू होने से वनोपज लूटने और बालू-गिट्टी के माफिया तत्वों की आर्थिक रीढ़ कमजोर होगी, जिनका प्रतिनिधित्व भाजपा करती रही है। ऐसे तत्वों को अब गंभीर मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।पार्टी मुख्यालय में मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि पेसा नियमावली पर भाजपा के वे नेता सवाल उठा रहे हैं, जो केंद्र में जनजातीय मामलों के मंत्री रह चुके हैं और तीन बार मुख्यमंत्री भी बने, लेकिन अपने कार्यकाल में पेसा को लागू करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पेसा पर काम करने के बजाय केवल अपनी जाति ‘पातर मुंडा’ को एसटी सूची में शामिल कराने पर ध्यान दिया गया।उन्होंने सवाल उठाया कि पेसा नियमावली पर कोई भी मांझी, मानकी, मुंडा, डोकलो या सोहोर जैसे पारंपरिक ग्राम प्रधान विरोध में क्यों नहीं बोल रहे हैं। केवल भाजपा को ही इससे परेशानी क्यों हो रही है। सुप्रियो ने कहा कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में पहले टीएसी का चेयरमैन गैर-आदिवासी रहा, बाबूलाल मरांडी के कार्यकाल में डोमेसाइल का नंगा नाच हुआ, तपकरा कांड जैसी घटनाएं घटीं और आदिवासियों पर गोलियां चलीं।उन्होंने भाजपा से छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे भाजपा शासित राज्यों में पेसा के प्रावधानों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। सुप्रियो ने कहा कि अब ग्राम सभा अपनी नीतियां स्वयं बनाएगी, किसी दबाव में माइनिंग लीज नहीं दी जा सकेगी। जंगलों की कटाई, केंदू पत्ता और अन्य वनोपज की लूट पर रोक लगेगी। हेमंत सोरेन ने पेसा नियमावली बनाकर शोषण मुक्त गांवों की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अब 10 किलो महुआ के बदले एक किलो सरसों तेल या पांच किलो मड़ुआ के बदले एक किलो चीनी जैसी शोषणकारी परंपराएं समाप्त होंगी। अखिल भारतीय सेवा की अधिकारी निशा उरांव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रियो ने कहा कि यह ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट से जुड़ा मामला है, जिस पर प्रशासन को संज्ञान लेना चाहिए।सीजीएल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसलासीजीएल परीक्षा मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को लेकर सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि यह भाजपा के तथाकथित बुद्धिजीवी मंच के गाल पर करारा तमाचा है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के सभी राजनीतिक हथकंडे अब वर्ष 2026 में समाप्त हो चुके हैं।

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