जगदीप धनखड़ का उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा

स्वास्थ्य कारणों का दिया हवाला, राष्ट्रपति और पीएम का जताया आभार नई दिल्ली। उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इसके लिए स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है। सोमवार शाम धनखड़ ने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में लिखा, “स्वास्थ्य की प्राथमिकता और चिकित्सकीय सलाह का पालन करते हुए मैं तत्काल प्रभाव से भारत के उप राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे रहा हूं।” पत्र में उन्होंने राष्ट्रपति को उनके सहयोग और सौहार्दपूर्ण संबंधों के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद का भी आभार जताया। जगदीप धनखड़ ने वर्ष 2022 में भारत के 14वें उप राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। 6 अगस्त 2022 को हुए चुनाव में उन्होंने विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया था। इस चुनाव में उन्हें 725 में से 528 वोट मिले थे, जबकि अल्वा को 182 मत मिले थे। उप राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने राज्यसभा के सभापति के तौर पर सदन की गरिमा बनाए रखने का प्रयास किया। राजस्थान के झुंझुनू जिले के रहने वाले 70 वर्षीय जगदीप धनखड़ का जन्म 18 मई 1951 को साधारण किसान परिवार में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में हुई। इसके बाद उन्हें सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में दाखिला दिलाया गया। धनखड़ का चयन नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) में भी हुआ था, लेकिन उन्होंने वहां जाने के बजाय राजस्थान विश्वविद्यालय से स्नातक और फिर कानून की पढ़ाई करने का निर्णय लिया। जयपुर में वकालत की शुरुआत करने के बाद वे राजनीति में सक्रिय हुए। धनखड़ 1989 में झुंझुनू से लोकसभा सांसद चुने गए। इसके बाद वीपी सिंह और चंद्रशेखर सरकार में 1989 से 1991 तक केंद्रीय मंत्री के रूप में भी कार्य किया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 30 जुलाई 2019 को उन्हें पश्चिम बंगाल का 28वां राज्यपाल नियुक्त किया था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच कई मुद्दों पर अपनी स्पष्ट भूमिका निभाई, जिससे वे लगातार चर्चा में बने रहे। धनखड़ का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब देश में महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। उनके इस्तीफे के बाद नए उप राष्ट्रपति की नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है।

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